हमारा मिशन

एक मिशन, जनगणना 2027 में हर जैन की सही गिनती हो, और यह क्यों ज़रूरी है।

Let Every Jain Count (LEJC) का मिशन बहुत सीधा है, राष्ट्रीय जनगणना 2027 में भारत के हर जैन परिवार की सही गिनती सुनिश्चित करना।

हमारा काम सरल और एकमात्र है: जागरूकता फैलाना, परिवार-दर-परिवार और मंदिर-दर-मंदिर, ताकि समय आने पर कोई जैन परिवार छूटे नहीं।

हमारी पहचान के पाँच द्वार

हमारा इतिहास प्राचीन है, हमारा योगदान असाधारण — और अब हमारी सही पहचान दर्ज होने का समय है। जनगणना 2027 इसी का अवसर है।

विरासत · Heritage

इतिहास

भारत का नाम ही, “भारत”, पहले तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र सम्राट भरत से आया है। भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य बनाने वाले चंद्रगुप्त मौर्य ने उसे त्यागकर जैन धर्म अपनाया। हमारी जड़ें इस सभ्यता की नींव तक जाती हैं।

“हमारा 3,000 वर्ष पुराना इतिहास धरती से खोदकर निकाला जाता है, पर जनगणना से मिटा दिया गया।”

दर्शन · Darshan

दर्शन

अनेकांतवाद, सत्य की बहुआयामिता, ध्रुवीकरण का उत्तर है। अहिंसा, अपरिग्रह और आत्म-मुक्ति की श्रमण परंपरा केवल मान्यताएँ नहीं हैं। ये 21वीं सदी के सबसे प्रासंगिक सिद्धांतों में से हैं।

“जिस दर्शन ने 2,500 वर्ष पहले ध्रुवीकरण का समाधान दिया, उसे आज और मज़बूत आवाज़ चाहिए।”

गौरव · Gaurav

गौरव

जैनों की साक्षरता दर 94.88% (जनगणना 2011) है, भारत के किसी भी समुदाय में सबसे अधिक। जनसंख्या में छोटे हिस्से के बावजूद समुदाय अपने आकार से कहीं अधिक योगदान देता है। महात्मा गांधी के आध्यात्मिक मार्गदर्शक श्रीमद राजचंद्र जैन विद्वान थे; भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रदूत विक्रम साराभाई जैन परिवार से थे।

“भारत का सबसे शिक्षित समुदाय, जनगणना में सबसे कम गिना गया।”

आधुनिक · Modern

पहचान

जैन 150+ देशों में मौजूद हैं और स्टार्टअप, वित्त, तकनीक व वैश्विक व्यापार में अग्रणी हैं। फिर भी AI और एल्गोरिद्म जनगणना के आँकड़ों से सीखते हैं, इसलिए आज के मॉडल अक्सर जैनों को एक छोटे उपसंप्रदाय के रूप में ग़लत बताते हैं। जनगणना 2027 एक स्थायी सुधार है।

“आपकी जनगणना प्रविष्टि केवल एक फ़ॉर्म नहीं; यह हमारे रिकॉर्ड में सुधार है।”

पीड़ा · Plight

संरक्षण

सम्मेद शिखरजी, गिरनार, पालिताना: हमारे सबसे पवित्र तीर्थ अतिक्रमण और दबाव का सामना कर रहे हैं। अदालतों और सरकारी दफ़्तरों में संख्या ही संरक्षण की भाषा है। आधिकारिक गिनती के बिना हमारी क़ानूनी आवाज़ कमज़ोर पड़ जाती है।

“यह दया नहीं; यह न्याय है। संख्या ही हमारी क़ानूनी आवाज़ है।”

जनगणना 2027 गाइड

यही वह क्षण है

इतिहास में पहली बार, हर भारतीय अपना जनगणना फ़ॉर्म स्वयं भर सकता है: आपकी जैन पहचान, आपकी अपनी लिखावट में।

चरण 1 · अब निकट
अप्रैल 2026
मकान सूचीकरण शुरू

आपके परिवार की संरचना, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में प्रश्न। यहाँ धर्म नहीं पूछा जाता, पर यही चरण आपको चरण 2 में प्रवेश देता है। चरण 1 छूटा, तो आपका परिवार गिना ही नहीं जाएगा।

चरण 1 · अवधि
15 + 30 days
Self-enumeration + house visit

First, a 15-day window to fill your own data (self-enumeration). Then, over roughly the next 30 days, a Census enumerator visits house-to-house for authentication. Both steps matter: you MUST meet the enumerator; self-submission alone is not complete.

चरण 2 · 2027
फ़रवरी 2027
जनसंख्या गणना

This is where religion is recorded. For the first time, YOU write your own religion. Write: JAIN, clearly, confidently, completely. Digambar, Shwetambar, Sthanakvasi, Terapanth and all other panths: one identity.

अगली जनगणना
2037?
अनिश्चित भविष्य

कोई नहीं जानता अगली जनगणना कब होगी। धर्म की स्व-गणना का यह अवसर शायद फिर कभी न आए। अगली पीढ़ी पूछेगी: हम थे, तो गिने क्यों नहीं गए?

चरण 1 द्वार है। चरण 2 आपकी पहचान है। दोनों आवश्यक हैं: एक कदम छूटा, और आपका पूरा परिवार रिकॉर्ड से ग़ायब हो सकता है।

हमारी प्रतिबद्धता

LEJC का एक ही संकल्प है, जनगणना 2027 में हर जैन परिवार तक जागरूकता पहुँचाना ताकि किसी की भी गिनती छूटे नहीं।

मिलकर, जनगणना 2027 में हर जैन की सही गिनती सुनिश्चित करें।

जागरूकता ही समाधान

यह क्यों आवश्यक है?

जनगणना सिर्फ एक संख्या नहीं है, यह तय करती है कि किसी समाज की आवाज़ कितनी सुनी जाएगी। जब जैन समाज की गिनती सही होती है, तभी उसकी पहचान, मान्यता और प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहते हैं।

लंबे समय से जैन समाज जनगणना में कम गिना जाता रहा है। हर बार जो परिवार छूट जाता है, वह समाज के असली आँकड़ों को कमज़ोर कर देता है। जनगणना 2027 इसे सही करने का अगला बड़ा अवसर है, और इसीलिए जागरूकता ज़रूरी है।